सरगुजा (छत्तीसगढ़)
सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत खामखुंट गांव में सड़क, बिजली, पेयजल एवं स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जुड़ी गंभीर शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है।
यह मामला उस समय सामने आया था जब पहाड़ी कोरवा (विशेष संरक्षित जनजाति) समुदाय की गर्भवती महिला सुंदरी, पत्नी अर्जुन, को प्रसव पीड़ा होने पर उसके परिजनों ने लगभग 6 किलोमीटर तक खाट (कांवड़) पर बैठाकर जंगल और पहाड़ी रास्तों से पैदल अस्पताल तक पहुंचाया। इसके बाद एम्बुलेंस की सुविधा मिली और प्रसव कराया गया, लेकिन समय पर समुचित उपचार न मिलने के कारण नवजात शिशु की मृत्यु हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला व्यापक चर्चा में आया।
इस घटना के बाद मानवाधिकार सेंट्रल वाच एसोसिएशन (CWA) के चेयरमैन योगेंद्र कुमार सिंह (योगी) ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की कि क्षेत्र के आदिवासी एवं विशेष संरक्षित जनजाति के लोगों को सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि वे भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए 06 मई 2025 को जिलाधिकारी-सह-कलेक्टर, सरगुजा (छत्तीसगढ़) को मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद तथा 09 दिसंबर 2025 को अंतिम स्मरण पत्र (Final Reminder) जारी किए जाने के बाद भी आयोग को आवश्यक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई।
अधिकारियों के इस लापरवाह रवैये को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत जिलाधिकारी-सह-कलेक्टर, सरगुजा को समन जारी कर 24 अगस्त 2026 प्रातः 11:00 बजे आयोग के समक्ष आवश्यक रिपोर्ट सहित व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। आयोग ने यह भी कहा है कि यदि 17 अगस्त 2026 तक आवश्यक रिपोर्ट आयोग को प्राप्त हो जाती है, तो व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जा सकती है।
मानवाधिकार सेंट्रल वाच एसोसिएशन (CWA) के चेयरमैन योगेंद्र कुमार सिंह (योगी) ने आयोग की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन देशभर में मानवाधिकारों के संरक्षण तथा वंचित एवं आदिवासी समुदायों को न्याय दिलाने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।