राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने दस लाख रुपए मुआवजा देने का दिया निर्देश


सोनभद्र (यूपी) 

 शौचालय के सेप्टी टैंक में दो मासूमों की गिरकर मौत के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने   मानवाधिकार सी डब्लू ए की शिकायत पर मामले का संज्ञान लेते हुए सख्त कदम उठाते हुए मुआवजे की धन राशि में बढ़ोतरी का निर्देश दिया है। पूरा मामला विंडमगंज थाना क्षेत्र के केवाल गांव का है। मामला 2024 का है। गांव में खेलते हुए दो बच्चों की सेप्टी टैंक में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई थी।

 घटना बच्चों को खेलते समय टैंक पर रखी हुई पटिया के टूटने से हुई। पटिया की क्वालिटी इतना घटिया थी कि दो मासूमों का भार सहन नहीं कर सकी। जिससे दोनों बच्चे शौर्य कुमार पांच वर्ष, अंकित पांच वर्ष की सेप्टी टैंक में गिरने से मौत हो गई।

मामला प्रकाश में आने के बाद मानवाधिकार सी डब्लू ए के चेयरमैन योगेंद्र कुमार सिंह (योगी) ने प्रकरण की शिकायत आयोग भेजकर मृतकों के परिवार को उचित मुआवजा दिलाने एवं दोषियों के ऊपर कठोरतम कार्यवाही करने का अनुरोध किया था।

  आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी सोनभद्र को मामले की जांच करने और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। आयोग के निर्देश के अनुपालन में जिलाधिकारी ने  30.10.2025 को रिपोर्ट प्रस्तुत की। जांच रिपोर्ट लेटर नंबर 566/A.L-SDM-MA.A/2025 दिनांक 16.10.2025 के जारिए जमा की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि मरने वाले के कानूनी वारिश को सरकारी आदेश के अनुसार नेचुरल डिजास्टर रिलीफ फंड के तहत हर कानूनी वारिश के बैंक एकाउंट में ट्रेज़री सोनभद्र के करिए टोकन नंबर 6925/29398 दिनांक 11.03.2025 के करिए चार लाख रुपए (4,00.000/) की आर्थिक मदद दी गई है।

आयोग मामले पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए कहा कि रिपोर्ट देखने से पता चलता है कि जिम्मेदार विभाग की घोर लापरवाही है, जिसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है और दोनों मृतक नाबालिगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
आयोग ने जिम्मेदारों की लापरवाही पर सख्त कदम उठाते हुए मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम एक्ट के सेक्शन 18 (1)(a) के तहत उत्तर प्रदेश सरकार को उसके चीफ सेक्रेटरी के जरिए सो काज नोटिस जारी करते हुए आयोग ने कहा कि राज्य सरकार कमीशन को  4 लाख रुपए (चार लाख) का मुआवजा बढ़ा कर 10 लाख रुपए (दस लाख) क्यों न दे, ताकि वह मृतक के परिवार को दे सके। आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को चार सप्ताह के भीतर सो काज नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया है।