राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने चीफ सेक्रेटरी को दिया निर्देश, कहा मुआवजे की भुगतान को चार लाख से बढ़ाकर तीस लाख क्यों न किया जाय

मानवाधिकार सी डब्लू ए की शिकायत पर NHRC ने मामले का लिया संज्ञान

NHRC ने मृतकों की मुआवजे की धनराशि को बढ़ाने के लिए चीज सेक्रेटरी से पूछा क्यों न मुआवजे की राशि को 30 लाख रूपये की जाय 
चंदौली (यूपी

जनपद के मुगलसराय में जहरीली गैस से चार लोगों की मौत के मामले में आयोग ने उत्तर प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया है कि मृतकों के नॉमिनी को मिले चार लाख रुपए से बढ़ाकर तीस लाख क्यों न दिया जाए।

मई 2024 में मुगलसराय में चार लोगों की सेप्टी टैंक का सफाई करते समय जहरीली गैस की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई थी। 

पूरा मामला लाट नंबर दो का है जहां एक मकान में सेफ्टी टैंक सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आकर तीन सफाई कर्मियों की मौत हो गई थी। मजदूरों के बचाने के चक्कर में भवन स्वामी का पुत्र भी टैंक में गिर कर काल के गाल में समा गया।  मकान मालिक भारत जयसवान ने सेप्टिटैंक की सफाई के लिए तीन मजदूर विनोद रावत, कुंदन रावत, और लोहा को सफाई के लिए बुलाए थे। सभी कालीमहाल  निवासी थे।

मामला प्रकाश में आने के बाद मानवाधिकार सी डब्लू ए के चेयरमैन योगेंद्र कुमार सिंह (योगी) ने मामले की शिकायत NHRC में भेजी थी और  मृतकों के परिवार को उचित मुआवजा दिलाने का अनुरोध किया था।

आयोग में मामला दर्ज होने के बाद हर मृतक के परिजनों को चार चार लाख रुपए का मुआवजा प्रदान किया गया। 
मृतकों के परिवार से मिला था मानवाधिकार सी डब्लू ए की टीम 
आयोग ने जिलाधिकारी द्वारा प्राप्त  रिपोर्ट का अवलोकन करने पर पाया कि मैन्युअल स्कैवेंजर के रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम 2013 और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के उल्लंघन के तहत कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था।  रिपोर्ट में मैन्युअल एकैवेंजर के पास उपलब्ध सुरक्षा उपायों और उपकरणों के बारे में जानकारी की कमी थी। आयोग ने कहा कि मैन्युअल स्कैवेंजिंग या सीवर और  सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई में लगे व्यक्तियों के मानवाधिकारों की सुरक्षा पर NHRC की एडवाइजरी का पालन नहीं किया गया है।
 राजस्व विभाग द्वारा मृतक के परिजनों को दिए गए मुआवजे के तहत प्रत्येक परिवार को चार लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
आयोग ने सुप्रीप कोर्ट के एक फैसले  का हवाला देते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि केंद्र और राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि सीवर में होने वाली मौतों के मुआवजे को बढ़ाया जाए ( यह देखते हुए कि पहले तय की गई राशि, यानी 10 लाख रुपए , 1993 से लागू थी) इसे बढ़ाकर 30 लाख रुपए किया जाए। राज्य प्राधिकरण को प्रत्येक परिवार के लिए मुआवजे को 4 लाख रूपये से बढ़ाकर 30 लाख रूपये क्यों न किया जाय।

आयोग ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए अपने निर्देश में कहा है कि  मानवाधिकार  संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 18 के साथ पठित धारा 16 के तहत नगर पालिका परिषद मुगलसराय और संबंधित  विभाग के सरकारी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा कि आयोग की एडवाइजरी में निर्दिष्ट सुरक्षा गियर और अन्य उपकरण प्रदान न करने के मामले लापरवाही के लिए आयोग आपराधिक मुकदमा चलाने का आदेश क्यों न दे। 

 आयोग ने मामले पर 31/12/2025 को सुनवाई करते हुए  उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा कि 4 लाख मुआवजे के भुगतान को बढ़ाकर 30 लाख रुपए क्यों न किया जाए ।