राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने मानवाधिकार सी डब्लू ए की शिकायत पर मामले का लिया संज्ञान
कमिश्नर नवोदय विद्यालय को तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दिया निर्देश
चंदौली (यूपी)
नवोदय विद्यालय परीक्षा पास करने के बावजूद दिव्यांग बालिका का नवोदय विद्यालय में इस लिए दाखिला नहीं हो पाया कि वह दिव्यांग है। कहा गया है कि प्रतिभा किसी सहारे की मोहताज नहीं होती यह साबित कर दिखाया है एक दिव्यांग छात्रा वंदना ने। जिसने तमाम चुनौतियों के बावजूद नवोदय विद्यालय बैराठ की प्रवेश परीक्षा पास कर ली। लेकिन दुर्भाग्य वश उसकी दिव्यांगता ही उसके भविष्य की रोड़ा बन गई। बैराठ नवोदय विद्यालय ने दिव्यांगता का हवाला देकर उसे प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया।
दिव्यांग छात्रा बंदना शहाबगंज विकास खंड के बराव गांव के बबलू प्रजापति की लड़की है। जो दोनों हाथों से अक्षम है। जिसका 100% दिव्यांगता का प्रमाण पत्र भी बना हुआ है। पैर से लिखने पढ़ने के साथ साथ सुंदर - सुंदर पेंटिंग बनाने का कार्य भी करती है। गांव के कंपोजिट विद्यालय में पढ़ने के साथ ही ब्लॉक और जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर पुरस्कार भी जीत चुकी है। बैराठ नवोदय विद्यालय प्रशासन द्वारा दिव्यांग छात्रा को प्रवेश न देकर शिक्षा अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघ किया गया है। वही दिव्यांग के लिए बनाए गए अधिनियम का भी उल्लंघन है। जो शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर और बिना किसी भेदभाव के शिक्षा प्राप्त करने की गारंटी देता है।
मामला प्रकाश में आने के बाद मानवाधिकार सी डब्लू ए के चेयरमैन योगेंद्र कुमार सिंह (योगी) ने प्रकरण की शिकायत NHRC में भेजकर निष्पक्ष जांच कर विद्यालय के प्रधानाचार्य तथा प्रशासन के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। तथा दिव्यांग छात्रा को नवोदय विद्यालय में तत्काल दाखिला दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएं जिससे वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकें और समाज के मुख्य धारा का हिस्सा बन सके।
आयोग ने दिनांक 24/03/2026 को मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप पीड़ित के मानवाधिकारों का गंभीर उलंघन है।