सोनभद्र में ट्रामा सेंटर की बदहाली पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को किया तलब



सोनभद्र (यूपी)

जिम्मेदारों की उदासीनता से जिला अस्पताल परिसर में नौ साल पूर्व बने ट्रामा सेंटर की बदहाली पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने मानवाधिकार सी डब्लू ए की शिकायत पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश सरकार को आयोग के समक्ष उपस्थि होने का सख्त निर्देश दिया है।

प्रकरण प्रकाश में आने के बाद मानवाधिकार सी डब्लू ए के चेयरमैन योगेंद्र कुमार सिंह (योगी) ने ट्रामा सेंटर की बदहाली की शिकायत आयोग में भेजकर उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। 

ट्रामा सेंटर को बने लगभग आठ वर्ष से ज्यादा हो गया लेकिन वहां डाक्टरों की भारी कमी है। जिसके कारण बीमार और घायल लोगों को इलाज के लिए वाराणसी या किसी निजी सेंटर में रेफर किया जाता है। सोनभद्र जिले में पिछले चार सालों में 2000 से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में 1000 लोगों की जाने चली। ट्रामा सेंटर लोगो की जीवन बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन डाक्टरों और  पैरामेडिकल स्टॉप की कमी के कारण मरीजों को विशेष या आपातकालीन इलाज के लिए वाराणसी पहुंचने के लिए 100 किलोमीटर से अधिक की यात्रा करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। मानवाधिकार सी डब्लू ए ने NHRC को भेजी गई शिकायत में बताया था कि जिला मेडिकल अस्पताल में ट्रामा सेंटर बनाया गया था, हालांकि लगभग आठ सालों से अधिक समय से इसे लगातार नदर अंदाज किया जा रहा है और डाक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टॉप की कमी के कारण मरीजों को स्पेशलाइज्ड या इमरजेंसी इलाज के लिए वाराणसी पहुंचने के लिए 100 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा करने के लिए मजबूत होना पड़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि ट्रामा मरीजों का इलाज ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज ,सोनभद्र के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में किया जा रहा है। यह भी बताया गया कि NMC गाइडलाइंस में मेडिकल कालेजों में अलग से ट्रामा सेंटर होने का कोई प्रावधान नहीं है।

हालांकि आयोग ने कहा कि ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश सरकार मुद्दों को छुपाने की कोशिश कर रही है और रिपोर्ट से खुद पता चलता है कि सोनभद्र में मेडिकल कॉलेज में भी कोई ट्रामा सेंटर नहीं है, हालांकि मरीज का इलाज इमरजेंसी डिपार्टमेंट में किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि क्या ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज सोनभद्र के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में कोई ट्रांमेट्रोलॉजिस्ट और स्पेशलिस्ट पैरामेडिकल स्टॉप तैनात है।

आयोग ने कहा कि असली मुद्दा यह है कि जिला अस्पताल सोनभद्र में एक डेडीकेटेड ट्रामा सेंटर बनने के बावजूद इसे जनता के लिए क्यों नहीं खोला गया? उत्तर प्रदेश सरकार ने इस ट्रामा इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने में करोड़ों रुपए खर्च किए होंगे  बावजूद इसे नजर अंदाज किया गया।
आयोग द्वारा कई बार याद दिलाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों से कोई रिपोर्ट नहीं मिली। अधिकारियों के लापरवाही पर आयोग ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को 09.03.2026 को सुबह 11.00 बजे कमीशन के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए सशर्त सम्मन जारी किया है। हालांकि यदि आवश्यक रिपोर्ट 02.03.2026 को या उससे पहले जमा कर दी जाती है तो उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति माफ कर दी जाएगी।