राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने चीफ सेक्रेटरी यूपी को जारी किया कारण बताओ नोटिस, कहा क्यों न दिया जाए विषाक्त भोजन खाने से मृत छात्र के परिजन को मुआवजा


देवरिया (यूपी)

  राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय अहिरौला में विषाक्त भोजन खाने से एक छात्र की मौत के मामले में मानवाधिकार सी डब्लू ए की शिकायत का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने सख्ती दिखाते हुए चीफ सेक्रेटरी उत्तर प्रदेश सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न मृतक छात्र एवं बीमार छात्रों के परिजनों को मुआवजा दिया जाए। देवरिया जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय अहिरौना में  अगस्त 2024 में फूड पाइजनिंग से 80 छात्रों की तबियत खराब हो गई थी। 62 छात्रों को महर्षि देवरहवा बाबा मेडिकल कॉलेज देवरिया में भर्ती कराया गया था। फूड प्वाइजनिंग से शिवम् यादव पुत्र सदानंद यादव निवासी भैंसहीया रामनगर थाना फरेंदा की मौत हो गई थी।

 ह्यूमन राइट सी डब्लू ए ने आयोग के भेजे गए शिकायत में उल्लेख किया था कि विद्यालय में भोजन तैयार करने में घोर लापरवाही और भ्रष्ट आचरण के कारण घटिया भोजन परोसा गया था  जिससे फूड प्वाइजनिंग हो गई और एक बच्चे को मौत हो गई।

मामला प्रकाश में आने के बाद मानवाधिकार सी डब्लू ए के चेयरमैन योगेंद्र कुमार सिंह (योगी) ने प्रकरण की शिकायत आयोग में भेजकर मृतक छात्र के परिजन एवं बीमार छात्रों को उचित मुआवजा दिलाने एवं दोषियों के ऊपर कठोरतम कार्यवाही करने का अनुरोध किया था।

आयोग मामले का संज्ञान लेते हुए शिकायत की प्रति जिलाधिकारी देवरिया एवं  चीफ सेक्रेटरी बेसिक एजुकेशन को भेजकर छह सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
आयोग ने उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार के समक्ष मामला उठाए जाने का भी निर्देश दिया है और पूछा है कि आयोग यदि मामले का संज्ञान लिया है तो उससे  तिथि प्राप्त की जाए ।


आयोग के निर्देश के क्रम में जिला मजिस्ट्रेट देवरिया ने अपने पत्र दिनांक 11.04.2025 द्वारा समाज कल्याण अधिकारी देवरिया की रिपोर्ट अग्रेषित की जिसमें बताया कि छात्रों को दोपहर का भोजन मेनू के अनुसार परोसा गया था। कुछ छोले बचे थे जो रसोई में रखे थे। रात के खाने के दौरान, छात्रों ने खिचड़ी के बजाए चावल और डाल मांगी। कुछ छात्रों ने बचे हुए छोले देखे और खा लिए। वे बीमार पड़ गए और प्राथमिक उपचार के लिए मेडिकल कालेज देवरिया में भर्ती कराया गया। वहीं छात्र शिवम यादव को मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर करने के बावजूद बचाया नहीं जा सका। प्रधानाचार्य को निलंबित कर दिया गया और फार्म के साथ अनुबंध रद्द कर दिया गया है। इस मामले में मेसर्स कन्हैया इंटरप्राइजेज नामक फार्म के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।

आयोग ने रिपोर्ट पर विचार करते हुए कहा है कि यह सुनिश्चित करना स्कूल प्रशासन का मुख्य कर्तव्य है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भोजन परोसा जाए। इस मामले में प्रशासन उचित सावधानी बरतने में विफल रहा है, जिसमें कारण यह दुर्घटनापूर्ण घटना घटी। स्कूल प्रशासन की लापरवाही के कारण छात्रों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। प्रधानाचार्य का निलंबन से मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक स्थापित मामला बनता है और मुआवजा दिए जाने का एक उपयुक्त मामला बनाया है।


आयोग ने दिनांक 30/08/2025 को मामले पर सुनवाई करते हुए  सख्त कदम उठाते हुए चीफ सेक्रेटरी यूपी सरकार को मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 18 (a) (i) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए यह बताने का निर्देश दिया है कि आयोग मृत छात्र शिवम यादव और दूषित भोजन खाने से बीमार हुए अन्य छात्रों के रिश्तेदारों को उचित मुआवजा देने की अनुशंसा क्यों न करे। आयोग ने चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।