इलाज के अभाव। में बच्ची ने पिता की गोद में तोड़ा दम ,राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने चीफ सेक्रेटरी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण झारखंड से तलब की रिपोर्ट



साहिबगंज (झारखंड)

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बे पटरी हो गई है। हॉस्पिटलों का हाल ऐसा है कि वहां डॉक्टर नदारत है। जिसके कारण मरीजों की मौत हो जा रही है। सदर अस्पताल में इलाज के अभाव में छह साल की मलेरिया पीड़ित बच्ची ने अपने पिता की गोद में दम तोड़ दिया। इससे पहले उसके पिता ने डाक्टरों की तलाश में करीब एक घंटे तक अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक भटकते रहे। मृतक बच्ची को लेकर पिता काफी देर तक हॉस्पिटल में रोते बिलखते रहे। उन्होंने बच्ची की मौत का जिम्मेदार डाक्टरों को बताया। मंडरो प्रखंड के सिमरिया गांव निवासी मथियस मालतो की छह साल की बेटी गोमदी पहाड़िन मलेरिया से पीड़ित थी। उसे लेकर सदर अस्पताल गया बेटी को गोद में लेकर डाक्टरों को खोजता रहा लेकिन कोई डाक्टर नहीं मिला और बेटी पिता की गोद में ही दम तोड़ दिया। ऐसी घटनाएं सभ्य मानव समाज के ऊपर एक कलंक है। समय से इलाज मिल जाता तो बच्ची  की जान बच सकती थी। मामला सितंबर का है

घटना की शिकायत मानवाधिकार सी डब्लू ए के चेयरमैन योगेंद्र कुमार सिंह ने आयोग में भीकर मृतक परिवार को उचित मुआवजा दिलाने और दोषी डाक्टरों के ऊपर कठोरतम कार्यवाही करने का अनुरोध किया था।

आयोग ने कहा कि मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को देस के सभी मानव अधिकारों की रक्षा और संवर्धन का दायित्व सौंपा है और PHR अधिनियम 1993 की धारा 13 के अंतर्गत जांच के लिए सिविल न्यायालय के सामन शक्तियां प्रदान की है।
आयोग ने मामले पर 25/07/2025 को सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टता पीड़िता के मानवाधिकारों का गंभीर मुद्दा है

माननीय सदस्य प्रियंका कानूनगो की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की पीठ ने इस मामले में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के अंतर्गत संज्ञान लिया है। पीठ ने चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करवाएं और आयोग के अवलोकनार्थ चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।